ऐसे में इस पूरे प्रकरण में माघ मेला प्रयागराज प्रशासन ने अब एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है प्रशासन के द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को नोटिस भेजकर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है जिसमें साफ़ तौर पर शंकराचार्य पद को साबित करने की बात कही गई है
प्रशासन ने बताया हैं शंकराचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है तो आप अपने आपको शंकराचार्य कैसे लिखते हैं जबकि कोर्ट ने अभी तक न ही इस मामले पर कोई फैसला दिया है न ही आपको शंकराचार्य के रुप में स्वीकार किया हैं
ऐसे अब कहीं न कहीं यह पूरा घटनाक्रम और भी गहराता हुआ नजर आ रहा है
पीठ के सदस्यों और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के समर्थकों में आक्रोश है उनका कहना है यह सनातन परंपरा और पीठ की मान्यता पर सीधा प्रहार हैं । धार्मिक गतिविधियां शास्त्रों और धार्मिक नियमों से चलती है न कि कोर्ट और प्रशासन से

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