जौनपुर - ज़िले का बहुचर्चित दूल्हा आजाद बिंद हत्याकांड में सोमवार को उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब इस मामले में नामजद मेडिकल स्टोर संचालक अविनाश सिंह चौहान के परिजन न्याय की मांग लेकर जिला मुख्यालय पहुंच गए।
अविनाश के परिजनों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवानी का मांग किया है
आपको बता दें कि इस दौरान अविनाश सिंह चौहान की पत्नी ईशा सिंह अपने पति के लिए न्याय की गुहार लगाते-लगाते भावुक हो उठीं। जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। मौके पर मौजूद परिजनों और अन्य लोगों ने उन्हें संभाला, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
आरोपी अविनाश की बहन काजल सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई को राजनीतिक रंजिश का शिकार बनाया जा रहा है। और बड़उर गांव की प्रधानपति अमर बिंद के द्वारा षड्यंत्र करके इस हत्याकांड में अविनाश का नाम शामिल कराया गया हैं।
साथ ही उनके द्वारा बताया गया है कि पुलिस ने 2 और 4 मई को उनके भाई से विस्तृत पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद पुलिस संतुष्ट होकर उन्हें घर भेज चुकी थी, लेकिन उसके बाद 11 मई को दोबारा उनका नाम इस मामले में जोड़ दिया गया। जिसपर परिजनों ने सवाल खड़ा किया है पूछताछ होने के बाद छोड़ने के बाद फिर से अविनाश का नाम कैसे जोड़ा गया । जबकि अविनाश सिंह चौहान का कोई अपराधिक रिकार्ड भी नहीं है कहीं भी कोई मुकदमा उसके उपर नहीं हैं।
परिवार के द्वारा यह भी दावा किया गया कि घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। उनका कहना है कि यदि इन फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
वहीं अविनाश की पत्नी ईशा सिंह ने कहा कि उनके पति को बिना पर्याप्त साक्ष्यों के इस मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं और पूरा परिवार अविनाश पर निर्भर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बयान देने वाली दूल्हे की बहन सौम्या बिंद को उनके पति का नाम तक ज्ञात नहीं था, फिर भी उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया।
ऐसे में अब परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके और किसी निर्दोष व्यक्ति को कानून की प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।

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